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चलने बदल गया बहार में जब मिला आपका साथ लगी जीने मुझ पर बड़ा आभार कोई डर नहीं चाहत धरती मुस्कुराने गति को भुला नहीं पाऊंगा सत्य मार्ग hindi kavita गुनगुनाने लगी हूँ दो ज़िन्दगी मिटने वाला है अंधेरा तन्हा हिन्दी कविता

Hindi चलने लगी मेरी श्वांस Poems